Wednesday, May 27, 2015

प्रोन्नति में आरक्षण पर हाई कोर्ट की रोक

हाई कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग को प्रोन्नति में 20 प्रतिशत आरक्षण देने पर रोक लगा दी है। साथ ही हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान याची दिनेश कुमार व अन्य की ओर से कहा गया कि गलत तरीके से प्रमोशन में एससी वर्ग को आरक्षण देने की व्यवस्था की गई है। हरियाणा सरकार ने 14 फरवरी 2013 को वरिष्ठ आइएएस अधिकारी पी राघेवंद्र की कमेटी का गठन कर प्रदेश में एससी के पिछड़ेपन और उनके प्रतिनिधित्व के बारे में रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। कमेटी ने रिपोर्ट में कहा कि एससी अब भी पिछड़े हुए हैं। इस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए प्रदेश सरकार ने गत 15 मई को नोटिफिकेशन जारी कर एससी वर्ग के लिए प्रमोशन में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कर दिया। इस प्रावधान के तहत उन्हें 1 अप्रैल 2013 से इसका लाभ दिया जाना है।

डीयू में दाखिले आज 28 मई

दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले की दौड़ बृहस्पतिवार से शुरू हो रही है। शैक्षणिक सत्र 2015-16 में स्नातक की 54 हजार सीटें हैं। जो छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए आवेदन करना चाहते हैं वे ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों तरह से फॉर्म भर सकते हैं। ऑनलाइन फॉर्म 28 मई से और ऑफलाइन 5 जून से भरे जाएंगे। फॉर्म भरने की प्रक्रिया 15 जून तक चलेगी। ज्यादा से ज्यादा छात्र ऑनलाइन आवेदन करें इसीलिए ऑनलाइन प्रक्रिया को एक सप्ताह पहले शुरू किया जा रहा है।

गेस्ट टीचरों पर सुनवाई 29 मई को

सरकार के नोटिस पर गेस्ट टीचरों ने डिवीजन बेंच में दायर की अपील
एकल बेंच में फटकार, सरकार ने कार्रवाई के लिए मांगा समय


हरियाणा सरकार द्वारा जारी नोटिस के खिलाफ गेस्ट टीचरों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर कर दी है। इस पर सुनवाई 29 मई को होगी। बुधवार को 4073 सरप्लस गेस्ट टीचरों को हटाने के मामले में जस्टिस अमित रावल ने सुनवाई दोपहर बाद तक स्थगित कर दी।
 इस बीच गेस्ट टीचरों ने फिक्स टुडे के तहत डिविजन बेंच में अपील दायर कर दी, लेकिन जब सुनवाई शुरू हुई तो गेस्ट टीचरों के वकील कोर्ट में पेश नहीं हो पाए, जिस पर बेंच ने मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार तक स्थगित कर दी।

Monday, May 25, 2015

हरियाणा के 4073 अतिथि शिक्षकों की आखिरी उम्मीद भी खत्म

हरियाणा के 4073 अतिथि शिक्षकों की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई है। पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को उन्हें हटाने के राज्य सरकार के नोटिस पर स्थगन देने से इन्कार करते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
जस्टिस अमित रावल ने कहा कि वे इस मामले में समय खराब क्यों कर रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट आदेश दे चुके हैं। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग को इन 4073 अतिथि शिक्षकों को हटा कर 27 मई से पहले स्टेटस रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश करनी है। पिछली सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के अतिथि शिक्षकों के प्रति नरम रवैये पर सख्त रवैया अपनाते हुए हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को फटकार लगाई थी और सभी को हटाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। वहीं, एकल बेंच द्वारा अपील खारिज करने के बाद अतिथि शिक्षकों के सामने अब केवल डिवीजन बेंच में नोटिस को चुनौती देने का रास्ता बचा है। मंगलवार को इस मामले में अपील दायर हो सकती है।

Friday, May 22, 2015

अतिथि अध्यापकों को फिलहाल पक्का नहीं करेगी सरकार

हरियाणा की मनोहर सरकार अतिथि अध्यापकों की समस्या का समाधान निकालने पर सहमत हो गई है। मास्टर (टीजीटी) पदों पर कार्यरत इन अतिथि अध्यापकों से प्रदेश सरकार नौंवी व दसवीं के विद्यार्थियों को पढ़वा सकती है। यह भी इसलिए क्योंकि स्कूलों में नौंवी व दसवीं के विद्यार्थियों की संख्या तो अधिक हैं लेकिन इनके मुकाबले शिक्षकों की भारी कमी है। यह कार्रवाई कोर्ट के माध्यम से ही होगी। इस बारे में सरकार की ओर से प्रदेश के मुख्य सचिव पहले ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पेश होकर शपथ-पत्र दायर कर चुके हैं।
अतिथि शिक्षकों के आंदोलन को देखते हुए और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के सुझाव के बाद शुक्रवार को सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में मंत्रिसमूह की बैठक हुई। सीएम कार्यालय में हुई इस बैठक में राज्य मंत्री कृष्ण बेदी के छोड़कर बाकी सभी मंत्री मौजूद रहे। मंत्रिसमूह में इस बात को लेकर सर्वसम्मति बनी है कि किसी भी तरीके से गेस्ट शिक्षकों को राहत दी जाए। यह प्रस्ताव भी आया कि टीजीटी को पीजीटी के पदों पर पदोन्नति दे दी जाए, लेकिन सरकार इस पर राजी नहीं हुई। हालांकि मंत्रिसमूह की बैठक से बाहर आकर यही दावा किया गया कि टीजीटी को पीजीटी के पदों पर पदोन्नति के बाद जो टीजीटी (मास्टर) के जो पद खाली रह जाएंगे, उन पर अतिथि अध्यापकों को एडजेस्ट किया जाएगा।

Wednesday, May 13, 2015

हरियाणा में अब 8612 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया रद

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने साढ़े 8 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया रद कर दी है। आयोग 35 हजार कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पहले ही रद कर चुका है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा के अनुरूप कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जल्द नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए विभागों से खाली पदों का ब्योरा मांगा गया है। करीब 80 हजार अलग-अलग भर्तियां होनी हैं। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से 8612 उन पदों पर भर्ती प्रक्रिया रद की गई, जिनके विज्ञापन पिछली हुड्डा सरकार के कार्यकाल में हरियाणा स्कूल शिक्षक चयन बोर्ड ने निकाले थे। मनोहर सरकार पिछला कर्मचारी चयन आयोग और स्कूल शिक्षक चयन बोर्ड दोनों ही भंग कर चुकी है। नए सिरे से भर्ती के लिए मनोहर सरकार ने अपनी पसंद का आयोग बनाया और भारत भूषण भारती को चेयरमैन नियुक्त किया। नए आयोग ने पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स (पीजीटी), एचईएस-द्वितीय ग्रुप बी सर्विस और मेवात कैडर के लिए भर्ती होने वाले 5765 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया।

Monday, May 11, 2015

हाईकोर् का गेस्ट टीचरों को दो सप्ताह में हटाने का निर्देश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अतिथि अध्यापकों के प्रति सरकार के नरम रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर 4073 सरप्लस टीचर को हटा कर रिपोर्ट दायर करें।
सोमवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने आदेश के बावजूद इन गेस्ट टीचर को नहीं हटाने पर कोर्ट रूम में मौजूद मुख्य सचिव डीएस ढेसी व स्कूल विभाग के प्रधान सचिव टीसी गुप्ता को फटकार लगाते हुए अवमानना के तहत कार्रवाई करने का संकेत दे दिया। बाद में दोनों अफसरों द्वारा माफी मांगने पर पीठ नरम पड़ी और निर्देश दिया कि सरकार पब्लिकेशन के तहत नोटिस जारी कर दो सप्ताह में इनकी सेवा समाप्त करे।
बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील जसबीर मोर ने पीठ को बताया कि ये टीचर सरप्लस नहीं हैं क्योंकि ये अब भी जमा दो क्लास तक पढ़ा रहे हैं। पीजीटी टीचर की नियुक्ति के बाद ही इन्हें सरप्लस माना जाए। सरकार ने भी याचिकाकर्ता के वकील की इस बात पर सहमति दी। इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि बीएड टीचर अगर जमा दो तक पढ़ाएं तो पढ़ाई का क्या स्तर रह जाएगा। सरकार अब अपनी बात से बदल रही है कि ये टीचर सरप्लस नहीं हैं जबकि पहले सरकार ने खुद हलफनामा देकर इनको सरप्लस बताया था। ऐसे में अब सरकार को इन टीचर को हटाना ही पड़ेगा। सुनवाई के दौरान सरकार ने नए पीजीटी भर्ती का कार्यक्रम की कोर्ट को जानकारी दी।
पीठ को बताया गया कि एक महीने के भीतर भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा।
एडवोकेट जगबीर मलिक ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गंभीरता से नहीं ले रही और आदेशों की पालना नहीं कर रही। हर महीने सरकार इन सरप्लस टीचर पर लगभग 9 करोड़ रुपये वेतन के नाम पर खर्च कर रही है जबकि इनका कोई काम नहीं है। मलिक ने आरोप लगाया कि राज्य में 15 हजार गेस्ट टीचर कार्यरत हैं। इनको रखने के लिए सरकार नियमित टीचरों की नियुक्ति नहीं कर रही। सरकार की यही कोशिश रहती है कि गेस्ट टीचर को कैसे बचाया जाए।