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Friday, August 12, 2016

हरियाणा सरप्लस गेस्ट टीचर्स की फाइल सीएम से मंजूर

एक सप्ताह के भीतर नौकरी पर रख लिए जाएंगे

हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में टीजीटी टीचर्स को कुछ विषयों में सरप्लस बता दिया था। जिस पर हाईकोर्ट ने उन्हें हटाने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने अब रोक लगाई है। रोक लगाने के बाद एससीएस पीके दास ने एडवोकेट जनरल से राय मांगी थी। मुख्यंमत्री मनोहर लाल, शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा, एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन, एससीएस पीके दास और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर की मीटिंग में दोबारा राय लेने का फैसला हुआ था। उसके बाद स्थितियां बदली और वीरवार को मुख्यमंत्री ने हटाए सरप्लस टीचर्स को दोबारा रखने की मंजूरी दे दी।

Friday, July 29, 2016

गेस्ट टीचर्स मामले में शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कोर्ट में तलब

 गेस्ट टीचर्स को लेकर दिए गए एक निर्णय का 5 साल बाद भी पालन नहीं होने पर मामला फिर से हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस बार कोर्ट ने सीधे शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को तलब किया है।
हरियाणा शिक्षा विभाग में कार्यरत गेस्ट टीचर्स सरकार और अधिकारियों के गले की फांस बने हुए हैंं। एक बार फिर गेस्ट टीचर्स मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार और शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लिया है।
दरअसल, हाईकोर्ट 30 मार्च 2011 को दिए अपने फैसले की 5 वर्ष बाद भी अनुपालना नहीं होने पर नाराज है। जस्टिस राजन गुप्ता की बेंच ने फटकार लगाते हुए शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।

Saturday, August 1, 2015

हाईकोर्ट के फैसलों का सम्मान करना सीखें गेस्ट टीचर

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अतिथि अध्यापकों को कड़ी फटकार लगाते हुए उनको राहत देने से इंकार कर दिया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए उन्हें सिंगल बेंच में अपील करने की छूट दे दी।
हटाए गए 4073 सरप्लस अतिथि अध्यापकों ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ द्वि-सदस्यीय पीठ के समक्ष अपील की थी। जस्टिस सूर्यकात की अध्यक्षता वाली द्वि-सदस्यीय पीठ ने बृहस्पतिवार को इस पर सुनवाई की। अतिथि अध्यापको की तरफ से आधा दर्जन वरिष्ठ वकील पैरवी के लिए आए। दो घंटे की सुनवाई में जस्टिस सूर्यकात की पीठ ने अतिथि अध्यापकों पर कई बार कड़ी टिप्पणी की।
 पीठ ने कहा कि अतिथि अध्यापक कोर्ट के आदेशों का सम्मान करना सीखें। स्कूलों में ताले लगाने, खाप पंचायतों की मदद व राजनितिक पार्टियों के समर्थन से वे गलतफहमी न पालें कि कोर्ट किसी दबाव में आएगी। कोर्ट स्कूलों में पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रखने के लिए हर तरह का आदेश देने में सक्षम है। लेकिन स्कूलों में तालाबंदी जैसी हरकत सहन नहीं करेगी।
 पीठ ने कहा कि नियमित भर्ती तक अतिथि अध्यापकों को सेवा में रखने की दलील अब सब समझ चुके हैं और ये दलील पुरानी पड़ चुकी है तथा 2006 से 2015 तक बहुत बार प्रयोग हो चुकी है। पीठ ने पूछा, किस आधार पर रोक चाहते हो। जब यह साबित हो चुका है कि नियुक्ति पिछले दरवाजे से हुई है और सरकार हलफनामा दे चुकी है कि ये अतिथि अध्यापक सरपल्स हैं।

Thursday, May 28, 2015

गेस्ट टीचर्स को नहीं मिली राहत, अपील खारिज

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के 4073 सरप्लस गेस्ट टीचरों को बड़ा झटका दिया है। प्रदेश सरकार के नोटिस को चुनौती देती याचिका नामंजूर होने के बाद दायर अपील भी वीरवार को खारिज हो गई।
जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस पीबी बजंतरी की डिवीजन बेंच ने कड़ी टिप्पणी की है कि तीन साल से सरकार इन गेस्ट टीचरों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करती आ रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट भी गेस्ट टीचरों को निकालने का आदेश दे चुका है।

Wednesday, May 27, 2015

गेस्ट टीचरों पर सुनवाई 29 मई को

सरकार के नोटिस पर गेस्ट टीचरों ने डिवीजन बेंच में दायर की अपील
एकल बेंच में फटकार, सरकार ने कार्रवाई के लिए मांगा समय


हरियाणा सरकार द्वारा जारी नोटिस के खिलाफ गेस्ट टीचरों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर कर दी है। इस पर सुनवाई 29 मई को होगी। बुधवार को 4073 सरप्लस गेस्ट टीचरों को हटाने के मामले में जस्टिस अमित रावल ने सुनवाई दोपहर बाद तक स्थगित कर दी।
 इस बीच गेस्ट टीचरों ने फिक्स टुडे के तहत डिविजन बेंच में अपील दायर कर दी, लेकिन जब सुनवाई शुरू हुई तो गेस्ट टीचरों के वकील कोर्ट में पेश नहीं हो पाए, जिस पर बेंच ने मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार तक स्थगित कर दी।

Monday, May 25, 2015

हरियाणा के 4073 अतिथि शिक्षकों की आखिरी उम्मीद भी खत्म

हरियाणा के 4073 अतिथि शिक्षकों की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई है। पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को उन्हें हटाने के राज्य सरकार के नोटिस पर स्थगन देने से इन्कार करते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
जस्टिस अमित रावल ने कहा कि वे इस मामले में समय खराब क्यों कर रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट आदेश दे चुके हैं। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग को इन 4073 अतिथि शिक्षकों को हटा कर 27 मई से पहले स्टेटस रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश करनी है। पिछली सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार के अतिथि शिक्षकों के प्रति नरम रवैये पर सख्त रवैया अपनाते हुए हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को फटकार लगाई थी और सभी को हटाने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। वहीं, एकल बेंच द्वारा अपील खारिज करने के बाद अतिथि शिक्षकों के सामने अब केवल डिवीजन बेंच में नोटिस को चुनौती देने का रास्ता बचा है। मंगलवार को इस मामले में अपील दायर हो सकती है।

Friday, May 22, 2015

अतिथि अध्यापकों को फिलहाल पक्का नहीं करेगी सरकार

हरियाणा की मनोहर सरकार अतिथि अध्यापकों की समस्या का समाधान निकालने पर सहमत हो गई है। मास्टर (टीजीटी) पदों पर कार्यरत इन अतिथि अध्यापकों से प्रदेश सरकार नौंवी व दसवीं के विद्यार्थियों को पढ़वा सकती है। यह भी इसलिए क्योंकि स्कूलों में नौंवी व दसवीं के विद्यार्थियों की संख्या तो अधिक हैं लेकिन इनके मुकाबले शिक्षकों की भारी कमी है। यह कार्रवाई कोर्ट के माध्यम से ही होगी। इस बारे में सरकार की ओर से प्रदेश के मुख्य सचिव पहले ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पेश होकर शपथ-पत्र दायर कर चुके हैं।
अतिथि शिक्षकों के आंदोलन को देखते हुए और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के सुझाव के बाद शुक्रवार को सीएम मनोहर लाल की अध्यक्षता में मंत्रिसमूह की बैठक हुई। सीएम कार्यालय में हुई इस बैठक में राज्य मंत्री कृष्ण बेदी के छोड़कर बाकी सभी मंत्री मौजूद रहे। मंत्रिसमूह में इस बात को लेकर सर्वसम्मति बनी है कि किसी भी तरीके से गेस्ट शिक्षकों को राहत दी जाए। यह प्रस्ताव भी आया कि टीजीटी को पीजीटी के पदों पर पदोन्नति दे दी जाए, लेकिन सरकार इस पर राजी नहीं हुई। हालांकि मंत्रिसमूह की बैठक से बाहर आकर यही दावा किया गया कि टीजीटी को पीजीटी के पदों पर पदोन्नति के बाद जो टीजीटी (मास्टर) के जो पद खाली रह जाएंगे, उन पर अतिथि अध्यापकों को एडजेस्ट किया जाएगा।

Wednesday, May 13, 2015

हरियाणा में अब 8612 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया रद

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने साढ़े 8 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया रद कर दी है। आयोग 35 हजार कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पहले ही रद कर चुका है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की घोषणा के अनुरूप कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जल्द नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए विभागों से खाली पदों का ब्योरा मांगा गया है। करीब 80 हजार अलग-अलग भर्तियां होनी हैं। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से 8612 उन पदों पर भर्ती प्रक्रिया रद की गई, जिनके विज्ञापन पिछली हुड्डा सरकार के कार्यकाल में हरियाणा स्कूल शिक्षक चयन बोर्ड ने निकाले थे। मनोहर सरकार पिछला कर्मचारी चयन आयोग और स्कूल शिक्षक चयन बोर्ड दोनों ही भंग कर चुकी है। नए सिरे से भर्ती के लिए मनोहर सरकार ने अपनी पसंद का आयोग बनाया और भारत भूषण भारती को चेयरमैन नियुक्त किया। नए आयोग ने पोस्ट ग्रेजुएट टीचर्स (पीजीटी), एचईएस-द्वितीय ग्रुप बी सर्विस और मेवात कैडर के लिए भर्ती होने वाले 5765 पदों पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया।

Monday, May 11, 2015

हाईकोर् का गेस्ट टीचरों को दो सप्ताह में हटाने का निर्देश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अतिथि अध्यापकों के प्रति सरकार के नरम रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर 4073 सरप्लस टीचर को हटा कर रिपोर्ट दायर करें।
सोमवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने आदेश के बावजूद इन गेस्ट टीचर को नहीं हटाने पर कोर्ट रूम में मौजूद मुख्य सचिव डीएस ढेसी व स्कूल विभाग के प्रधान सचिव टीसी गुप्ता को फटकार लगाते हुए अवमानना के तहत कार्रवाई करने का संकेत दे दिया। बाद में दोनों अफसरों द्वारा माफी मांगने पर पीठ नरम पड़ी और निर्देश दिया कि सरकार पब्लिकेशन के तहत नोटिस जारी कर दो सप्ताह में इनकी सेवा समाप्त करे।
बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील जसबीर मोर ने पीठ को बताया कि ये टीचर सरप्लस नहीं हैं क्योंकि ये अब भी जमा दो क्लास तक पढ़ा रहे हैं। पीजीटी टीचर की नियुक्ति के बाद ही इन्हें सरप्लस माना जाए। सरकार ने भी याचिकाकर्ता के वकील की इस बात पर सहमति दी। इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि बीएड टीचर अगर जमा दो तक पढ़ाएं तो पढ़ाई का क्या स्तर रह जाएगा। सरकार अब अपनी बात से बदल रही है कि ये टीचर सरप्लस नहीं हैं जबकि पहले सरकार ने खुद हलफनामा देकर इनको सरप्लस बताया था। ऐसे में अब सरकार को इन टीचर को हटाना ही पड़ेगा। सुनवाई के दौरान सरकार ने नए पीजीटी भर्ती का कार्यक्रम की कोर्ट को जानकारी दी।
पीठ को बताया गया कि एक महीने के भीतर भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा।
एडवोकेट जगबीर मलिक ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गंभीरता से नहीं ले रही और आदेशों की पालना नहीं कर रही। हर महीने सरकार इन सरप्लस टीचर पर लगभग 9 करोड़ रुपये वेतन के नाम पर खर्च कर रही है जबकि इनका कोई काम नहीं है। मलिक ने आरोप लगाया कि राज्य में 15 हजार गेस्ट टीचर कार्यरत हैं। इनको रखने के लिए सरकार नियमित टीचरों की नियुक्ति नहीं कर रही। सरकार की यही कोशिश रहती है कि गेस्ट टीचर को कैसे बचाया जाए।

Monday, March 9, 2015

अतिथि अध्यापकों को न हटाने पर फंसी सरकार

सरकारी स्कूलों में सेवारत अतिथि अध्यापकों को न हटाने पर राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। सोमवार को हाईकोर्ट ने हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सचिव टीसी गुप्ता द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जताते हुए 18 मार्च को उनको कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
सोमवार को एडवोकेट जगबीर मलिक ने एक प्रतिवादी की ओर से पार्टी बनते हुए हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट द्वारा अतिथि अध्यापकों को हटाने के आदेश की सभी कापी रिकार्ड में रखी। कोर्ट ने सरकारी पक्ष को फटकार लगाते हुए कहा कि अभी तक नियमित शिक्षकों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई और अतिथि हटाए क्यों नहीं गए?
इस सवाल पर सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि करीब 9000 जेबीटी टीचरों की जांच चल रही है उनकी तकनीकी जांच के बाद उनको नियुक्ति देकर अतिथि को हटाया जा सकता है। इस पर एक निजी पक्ष ने बेंच को बताया कि इन शिक्षकों से पहले सरकार करीब 14000 पीजीटी टीचरों की नियुक्ति कर चुकी है लेकिन अतिथि अध्यापकों को नहीं हटाया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि सरकार खुद हाईकोर्ट में स्वीकार कर चुकी है कि मास्टर तय संख्या से ज्यादा काम कर रहे है लेकिन सरकार अतिथि को फिर भी हटा नहीं रही।

Wednesday, September 3, 2014

अतिथि अध्यापकों को नहीं दिख रही उम्मीद की किरण

विधानसभा चुनाव से पहले पक्का होने की आस लगाए बैठे गेस्ट टीचर्स को एक और जोर का झटका लगा है। प्रदेश सरकार के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने भी अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने गेस्ट टीचर्स को तीन वर्षीय नियमितीकरण नीति के तहत पक्का न कर पाने के पीछे कानूनी अड़चनों का हवाला दिया है। प्रदेश के गेस्ट टीचर्स सर्व कर्मचारी संघ के नेताओं के साथ मुख्यमंत्री से सोमवार को वार्ता करने पहुंचे थे। संघ नेताओं ने मुख्यमंत्री से इसी कार्यकाल में आचार संहिता लगने से पहले गेस्ट टीचर्स का भी भला करने की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने संघ के महासचिव सुभाष लांबा व वजीर सिंह को बताया कि कांग्रेस कार्यकाल में ही गेस्ट टीचर्स पर सबसे अधिक मेहरबानी हुई है। इनका वेतन समय-समय पर बढ़ाया गया है। जो गेस्ट टीचर्स तीन वर्षीय नियमितीकरण नीति की शर्तो को पूरा करते थे, उन्हें कॉलेज कैडर व आइटीआइ में पक्का कर दिया गया है। स्कूलों में कार्यरत गेस्ट टीचर्स इस नीति के तहत नहीं आते हैं। उन्होंने संघ के नेताओं को आश्वासन दिया कि बावजूद इसके वह तीन वर्षीय नीति का अध्ययन कराएंगे। अगर गेस्ट टीचर्स इसके तहत आते होंगे तो प्रदेश के महा अधिवक्ता व कानूनी सलाहकार से राय के लेकर उन्हें पक्का करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

Wednesday, June 11, 2014

हरियाणा में गेस्ट टीचर्स के भी आएंगे अच्छे दिन

हरियाणा प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत गेस्ट टीचर्स के भी अच्छे दिन आने वाले हैं। दिसंबर 2005 से नवंबर 2007 तक नियुक्त हुए अतिथि अध्यापकों को पक्का होने की आस बंध गई है। प्रदेश सरकार ने मंगलवार को गेस्ट टीचर्स के नियमितीकरण के लिए दस वर्षीय पॉलिसी बनाने पर सहमति जता दी। गेस्ट टीचर्स पक्का होने के लिए बीते कई दिनों से ताकत झोंके हुए थे। उद्योग मंत्री रणदीप सुरजेवाला की अध्यक्षता में चंडीगढ़ से लेकर कैथल तक बैठकों का लंबा दौर चला। सुरजेवाला पहले गेस्ट टीचर्स के दोनों गुटों को एक मंच पर लाए और उसके बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से वार्ता तय कराई।

Wednesday, May 28, 2014

हरियाणा में कच्चे कर्मचारी होंगे नियमित

  • नीति के अंतर्गत ग्रुप बी, सी व ‘डी’ के कर्मचारी
  • 28 मई 2014 को हो तीन वर्ष की अवधि पूरी
  • गेस्ट टीचर्स इसके दायरे में नहीं

विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को साधने के लिए बड़ा पासा फेंका है। विभिन्न विभागों, बोर्ड व निगमों में कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को पंजाब की 2011 की नियमितीकरण नीति के तहत नियमित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई है। अनुबंध आधार पर लगे तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को नियमित करने के लिए पंजाब सरकार की नीति 28 मई 2014 से हूबहू लागू की जाएगी। पंजाब सरकार की 28 मार्च 2011 को लागू नीति के अंतर्गत ग्रुप बी, सी व ‘डी’ के ऐसे कर्मचारी जो सरकार या राज्य सरकार की स्वीकृत एजेंसियों के माध्यम से अनुबंध आधार पर 28 मई 2014 को तीन वर्ष की अवधि पूरी करते है तथा स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध लगे थे, उन्हें ही इसका लाभ मिलेगा।

गेस्ट टीचर्स के नियमित होने की आस धूमिल

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत गेस्ट टीचर्स की नियमित होने की आस धूमिल होती जा रही है। मुख्यमंत्री ने अतिथि अध्यापकों को पक्का करने में असमर्थता जताई है। हुड्डा ने टीचर्स को न तो कोई पॉलिसी बनाने का आश्वासन दिया है, न ही पक्का करने का। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि वह गेस्ट टीचर्स का अच्छा ही करेंगे।
मंगलवार को गेस्ट टीचर्स का 33 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल हुड्डा से मुलाकात करने नई दिल्ली पहुंचा था। हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ के प्रदेश संयोजक राजेंद्र शास्त्री ने अध्यापकों की मांगों को हुड्डा के समक्ष उठाया। काफी देर तक गेस्ट टीचर्स की मुख्यमंत्री के साथ वार्ता भी हुई, मगर अंतत निराशा ही हाथ लगी।
 हुड्डा ने दो टूक कह दिया कि वह उन्हें पक्का नहीं कर सकते। उनके बारे में उन्होंने जो सोच रखा है वह बेहतर ही है। कैबिनेट बैठक में गेस्ट टीचर्स को पक्का करने का निर्णय लेना होता तो वह कभी का ले चुके होते।

Tuesday, May 20, 2014

शिक्षा विभाग ने मांगा गेस्ट फैकल्टी का रिकॉर्ड

शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी का रिकॉर्ड मांगना शुरू कर दिया है। स्कूल एजुकेशन के डायरेक्टर की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। सभी जिलों से गेस्ट फैकल्टी की विस्तृत रिपोर्ट 23 मई तक भेजने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि जिले में गेस्टफैकल्टी की अपडेट की गई जानकारी और संख्या की जानकारी विभाग को भेजी जाए। इसके लिए एक निर्धारित परफोर्मा भी विभाग की ओर से भेजा गया है। पत्र में निर्देश जारी किए गए हैं कि इसकी विस्तृत जानकारी 23 मई से पहले विभाग को भेज दी जाए। इस परफोर्मा में गेस्ट फैकल्टी का नाम, जन्म तिथि, मोबाइल नंबर, कब से ड्यूटी पर लगे हैं, कैटेगरी, शैक्षणिक योग्यता, ड्यूटी कहां है आदि जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा यदि किसी गेस्ट टीचर का एचटेट पास हो चुका है तो उसकी जानकारी भी देनी होगी।

Sunday, February 23, 2014

सीएम हुड्डा ने कहा कोर्ट का फैसला आते ही करेंगे गेस्ट टीचर नियमित

काफी समय से अनशन पर बैठे हरियाणा के अतिथि अध्यापकों का अनशन प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने रविवार को तुड़वा दिया। जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे आधा दर्जन अध्यापकों के पास पहुंचे हुड्डा ने अध्यापकों को जूस पिलाया और उनके हित में जल्द फैसला करने का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले पर फैसला आते ही अध्यापकों को नियमित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने भूख हड़ताल करने के दौरान बर्खास्त किए गए 13 शिक्षकों को 25 फरवरी से नियमित करने का आश्वासन भी दिया। मुख्यमंत्री के बुलावे पर हरियाणा भवन पहुंचे एक दर्जन अध्यापकों ने कई अन्य मांगें भी रखीं।

बहाल होंगे बर्खास्त अतिथि अध्यापक
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बर्खास्त 13 अतिथि अध्यापकों की बहाली के आदेश सोमवार तक जारी हो जाने का भरोसा दिलाया है। शिक्षा निदेशालय ने रविवार को समझौता वार्ता से पहले अतिथि अध्यापकों को बर्खास्त कर दिया था।

Friday, December 13, 2013

हरियाणा शिक्षक भर्ती पर रोक हटने से 15 हजार अतिथि अध्यापकों की छुट्टी होना तय

हाई कोर्ट के शुक्रवार के फैसले से सबसे ज्यादा प्रभाव हरियाणा के 15 हजार से अधिक अतिथि अध्यापकों पर सीधे तौर पर पड़ेगा और उनकी छुट्टी होनी तय है। चुनाव नजदीक होने के कारण सरकार 20 हजार से ज्यादा शिक्षकों की नियमित भर्ती जल्दी पूरी करने की कोशिश करेगी।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एके मसीह पर आधारित खंडपीठ ने शुक्रवार को हरियाणा सरकार को बड़ी राहत दी। न्यायालय ने हरियाणा स्कूल टीचर सेलेक्शन बोर्ड को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। इसी के साथ ही आठ महीने से करीब 20 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रकिया पर रोक हट गई है।

Tuesday, September 10, 2013

हरियाणा टीचर भर्ती बोर्ड (HSTSB) पर फैसला आने में लग सकता है समय

हाई कोर्ट किसी केस पर फैसला सुरक्षित रखता है तो समय की कोई सीमा नहीं होती। कुछ मामलों में अगले दिन भी फैसला सुनाया जा सकता है तो कुछ में महीने भी लग सकते है। इस मामले में कोर्ट का फैसला टीचर भर्ती को एक नया मोड़ देगा। अगर याचिका खारिज कर दी जाती है तो पंद्रह हजार से ज्यादा टीचरों की भर्ती प्रकिया चलती रहेगी और उन्हें नियुक्ति मिलनी शुरू हो जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर गेस्ट टीचरों पर पड़ेगा क्योंकि इससे उनकी छुट्टी तय है। वहीं, अगर हाई कोर्ट याचिका को स्वीकार कर लेता है तो टीचर भर्ती बोर्ड रद हो जाएगा और इसके द्वारा की गई सभी नियुक्तियां गैरकानूनी मानी जाएंगी। इससे सरकार को नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी। हालांकि दोनों ही पक्ष अपने खिलाफ फैसला आने पर सुप्रीम कोर्ट की शरण लेने की तैयारी में हैं।

Sunday, July 14, 2013

हरियाणा में शिक्षक भर्ती के परिणाम पर फैसला आज

हरियाणा प्रदेश में शिक्षक भर्ती के परिणाम पर लगी रोक जारी रहेगी या नहीं, इसका फैसला सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पर आधारित खंडपीठ करेगी। 1इस मामले में हरियाणा लोक सेवा आयोग व टीचर सलेक्शन बोर्ड के सभी सदस्य खंडपीठ के सामने अपना जवाब दे चुके हैं। सरकार की तरफ से पहले ही जवाब दायर किया जा चुका है। सरकार ने कोर्ट से मांग की हुई है कि भर्ती परिणाम घोषित करने पर रोक सभी आदेश वापस लिया जाए। उधर, माध्यमिक शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक की तरफ से दायर जवाब में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि हाई कोर्ट ने गेस्ट टीचरों की नई नियुक्ति व कार्यकाल में बढ़ोतरी पर रोक लगाई हुई है। इस कारण शिक्षकों की नई नियुक्ति जल्दी करने का सरकार पर दवाब है। जवाब के अनुसार शिक्षा का अधिकार लागू करने के लिए तुरंत टीचरों की नियुक्ति जरूरी है।

Thursday, February 21, 2013

हरियाणा पात्रता परीक्षा में छूट लेकर भर्ती हुए शिक्षकों पर संकट

हरियाणा सरकार द्वारा गेस्ट टीचरों को पात्रता परीक्षा से छूट देने का मामला गले की फांस बनता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पात्रता परीक्षा में छूट देने के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पात्रता परीक्षा में छूट का लाभ लेकर नियुक्त हुए टीचरों की नियुक्ति इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को तीन सप्ताह में इस मामले में जवाब देने को भी कहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा पात्रता परीक्षा से छूट देने के निर्णय को सही ठहराने के फैसले के खिलाफ पात्र अध्यापक संघ से जुड़े उम्मीदवारों शिवानी गुप्ता व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट के निर्णय को रद करने की मांग की है। इस पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस अल्तमश कबीर, जस्टिस विक्रमजीत सिंह व जस्टिस अनिल आर दवे की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नागेश्र्वर राव ने बहस करते हुए कहा कि सरकार ने अतिथि अध्यापकों के संदर्भ में हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों को बाईपास कर अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के मकसद से नए सर्विस रूल में छूट संबंधी यह प्रावधान किया है।
 उन्होंने कहा कि पूर्व में भी सरकार ने नियमित अध्यापक भर्ती में अतिथि अध्यापकों को पात्रता से छूट व शिक्षण अनुभव के 24 अंक देने का प्रावधान किया था, जिसे हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का प्रयास मानते हुए रद कर दिया था। उन्होंने दलील दी कि अब हाई कोर्ट ने अपने फैसले में अतिथि व अन्य अध्यापकों को पात्रता से छूट देने के निर्णय को सही ठहराया है, लेकिन उसका कोई कानून सम्मत ठोस आधार हाई कोर्ट ने अपने फैसले में नहीं दिया है और न ही योग्य उम्मीदवारों को संविधान की धारा 14 व 16 के तहत प्रदत्त अधिकारों को ध्यान में रखा। चार बार मौका मिलने पर भी पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने में विफल रहे उम्मीदवारों को पात्रता परीक्षा पास योग्य उम्मीदवारों की श्रेणी में रखना कानून सम्मत नहीं है।