पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने उस आदेश पर रोक लगा दी है
जिसमें एकल बेंच ने ओवर ऐज हो चुके दो सौ से ज्यादा पीजीटी शिक्षकों को
नियुक्ति देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर
जवाब-तलब भी किया है।
हरियाणा सरकार ने इन शिक्षकों को गत वर्ष मेरिट में आने के बावजूद नियुक्ति पत्र देने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि ये अब ओवर ऐज हो गए हैं। चयनित शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
उनका कहना था कि हरियाणा सरकार ने वर्ष 2012 में हजारों
पीजीटी शिक्षकों की भर्ती के लिए आवेदन मागे थे। वर्ष 2014 में सरकार ने
विषय के अनुसार परिणाम घोषित करने शुरू किए। समय-समय पर अलग-अलग विषय के
परिणाम आने पर सरकार नियुक्ति पत्र जारी करती रही, परंतु बाद में जब हिंदी
सहित कुछ विषय के परिणाम आने शुरू हुए तो सरकार ने उन सभी शिक्षकों को
नियुक्ति पत्र जारी करने से इन्कार कर दिया, जिनकी आयु 40 वर्ष से ज्यादा
थी। जबकि सरकार कुछ महीने पहले 40 वर्ष से ज्यादा आयु वाले कई टीचरों को
नियुक्ति दे चुकी थी।हरियाणा सरकार ने इन शिक्षकों को गत वर्ष मेरिट में आने के बावजूद नियुक्ति पत्र देने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि ये अब ओवर ऐज हो गए हैं। चयनित शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिका के मुताबिक ऑनलाइन आवेदन के समय वर्ष 1981-82 के निर्देशों के अनुसार कहा गया था कि अगर किसी का नाम रोजगार कार्यालय में दर्ज है और उसे भर्ती में भाग लेने का मौका न मिला हो तो वह ओवर ऐज के बाद भी भर्ती में भाग लेने के लिए योग्य होगा। यहा तक कि सरकार द्वारा गठित कमेटी ने भी इन शिक्षकों को योग्य मानते हुए नियुक्ति पत्र देने का सुझाव दिया था। बावजूद इसके शिक्षा विभाग ने नियुक्ति पत्र जारी करने से मना कर दिया था। इस याचिका पर एकल बेंच ने नियुक्ति देने का आदेश दिया था। हरियाणा सरकार ने इसे डबल बेंच में चुनौती दी थी।
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