निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों
को भी अब एचटेट या इसी तरह की दूसरी शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी
होगी। शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के तहत यह नियम बनाया गया है ।
इस शर्त के कारण
निजी स्कूलों के हजारों टीचर बेकार हो सकते हैं जो न तो इन स्कूलों में
पढऩे वाले बच्चों के भविष्य के लिहाज से सही है और न शिक्षकों के लिहाज से।
अपनी यह मांग फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन बुधवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के साथ होने वाली
बैठक में भी उठाएगा।
आरटीई के तहत वर्ष 2015 तक निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले हर शिक्षक को
पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। जो ऐसा नहीं कर पाएगा, वह शिक्षक नहीं रह
सकता। शर्मा के अनुसार, पात्रता परीक्षा का रिजल्ट बहुत कम रहता है। ऐसे
में सवाल ये है कि जो टीचर पुराने हैं, वह इसे पास कैसे कर पाएंगे। उनकी
मांग है कि सरकार इस नियम से उन शिक्षकों को बाहर रखे जो आरटीई लागू होने
से पहले से निजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं।
निजी स्कूल संचालकों को मान्यता संबंधी
मानक पूरे करने के लिए राज्य सरकार कुछ और समय दे सकती है। इस मुद्दे पर
बुधवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, शिक्षामंत्री
गीता भुक्कल और विभागीय अफसरों के बीच होने वाली बैठक में फैसला हो सकता
है।
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