जेबीटी
प्रशिक्षितों को अब बैच वाइज ही नौकरी मिलेगी। प्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टेट) की अनिवार्यता से राहत दे दी है। अदालत ने
सरकार को आदेश दिए हैं कि इस मामले में 14 दिन के भीतर कार्रवाई करें।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जेबीटी के बैच 2002-04, 2003-05 और
2008-10 के लिए की जाने वाली नियुक्तियां बिना टीचर पात्रता परीक्षा
(टीईटी) के ही की जाएं। न्यायधीश संजय करोल ने कहा कि शिक्षा के अधिकार
अधिनियम में प्रदेश में बने जेबीटी के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत
टीईटी पास करना लाजिमी योग्यता नहीं की गई है। राज्य सरकार ने भी ऐसी कोई
शर्त नहीं थोपी थी। कोर्ट ने यह भी फैसला किया है कि जब सीडब्ल्यूपी
2994/2008 के तहत 3 जून, 2011 को हिमाचल हाइकोर्ट ने चार माह के भीतर
आरक्षण और भूतपूर्व सैनिक कोटे के बैकलॉग को भरने के नियमों के तहत जेबीटी
काडर में नियुक्तियां करने के आदेश देने के बाद भरे जाने वाले पद चिह्नित
कर नियुक्तियां होनी चाहिए थीं। ऐसे में भूतपूर्व सैनिकों की नियुक्ति बगैर
टैट के ही क्यों दे दी गई? ऐसे में केवल जेबीटी शिक्षकों पर ही सरकार टैट
को लेकर नियुक्ति के आदेश में पक्षपात पूर्ण नीति लागू नहीं कर सकती। कोर्ट
ने आदेश दिए कि प्रदेश सरकार 14 दिन के भीतर कार्रवाई करे, जिससे बैच वाइज
नियुक्तियां हो सकें।
Showing posts with label Himachal Pradesh. Show all posts
Showing posts with label Himachal Pradesh. Show all posts
Sunday, August 26, 2012
Friday, January 20, 2012
हिमाचल -खराब रिजल्ट देने वाले शिक्षकों की इंक्रीमेंट पर कैंची
बोर्ड की परीक्षा में खराब रिजल्ट देने वाले शिक्षकों और प्रवक्ताओं की इंक्रीमेंट पर कैंची चलेगी। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से सब्जेक्ट वाइज खराब रिजल्ट देने वाले शिक्षकों की सूची मांग ली है।
शिक्षकों को अपने विषय में बोर्ड परीक्षा के घोषित रिजल्ट प्रतिशतता का 50 फीसदी रिजल्ट देना अनिवार्य किया गया था। प्रदेश कई शिक्षक इस शर्तो को पूरा नहीं कर सके। इसके चलते शिक्षा निदेशक सेकंडरी ने सभी उपनिदेशकों से स्कूल वाइज ऐसे शिक्षकों और प्रवक्ताओं की सूची मंगवा ली है। उपनिदेशकों ने भी सभी स्कूलों से इस संदर्भ में सूची लेना शुरू कर दी है। प्रदेश में करीब 150 या इससे अधिक शिक्षकों की इंक्रीमेंट पर तलवार लटक गई है।
Wednesday, October 5, 2011
हिमाचल - सुप्रीम कोर्ट में जीतकर भी हारे टेन्योर अध्यापक
सुप्रीम कोर्ट में जीतने के बाद भी टेन्योर अध्यापकों को एडहॉक शिक्षकों के समान लाभ नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सरकार के पास पहुंच गया है। इसमें सभी श्रेणी के करीब 3102 अध्यापकों को सालाना दो हजार रुपए से तीन हजार रुपए तक का घाटा उठाना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद निदेशालय स्तर से मामला सरकारी स्तर पर उठाया गया, मगर अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। विभाग को अब भी इस मामले में सरकार के उन आदेशों का इंतजार है, जिसके आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं।
1987 में हुए नियमित: प्रदेश में एलीमेंट्री और हायर एजुकेशन में वर्ष 1987 के बाद लगे कुछ शिक्षकों को 1-1-94 से नियमित कर दिया गया। ये शिक्षक समान सेवा शर्तो पर लगे थे, लेकिन नियमित करते समय कुछ शिक्षक छूट गए। छूटे शिक्षकों को टेन्योर अध्यापक कहा गया और नियमित होने वाले शिक्षकों को तदर्थ शिक्षकों की श्रेणी में रखा गया। इससे टेन्योर अध्यापकों में रोष फैल गया और उन्होंने पहले सरकारी स्तर पर मामला उठाया।
1987 में हुए नियमित: प्रदेश में एलीमेंट्री और हायर एजुकेशन में वर्ष 1987 के बाद लगे कुछ शिक्षकों को 1-1-94 से नियमित कर दिया गया। ये शिक्षक समान सेवा शर्तो पर लगे थे, लेकिन नियमित करते समय कुछ शिक्षक छूट गए। छूटे शिक्षकों को टेन्योर अध्यापक कहा गया और नियमित होने वाले शिक्षकों को तदर्थ शिक्षकों की श्रेणी में रखा गया। इससे टेन्योर अध्यापकों में रोष फैल गया और उन्होंने पहले सरकारी स्तर पर मामला उठाया।
Subscribe to:
Posts (Atom)