पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एके सिकरी पर आधारित डिविजन
बैंच ने हाई कोर्ट की एकल बैंच द्वारा जारी उस आदेश पर रोक लगा दी जिसके
तहत एकल बैंच ने हरियाणा विधानसभा में भर्ती किए गए 13 क्लर्को की नियुक्ति
को रद कर उनको हटाने का आदेश जारी किया था।
इसके साथ ही कोर्ट ने हरियाणा सरकार को इस मामले में 10 मई के लिए नोटिस
जारी कर जवाब मांगा है। हाई कोर्ट ने यह आदेश स्पीकर हरियाणा विधान सभा व
चयनित उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका पर जारी किया। इस मामले में 22 जनवरी
को एकल बैंच ने अपने फैसले में विधानसभा में भर्ती किए गए 13 क्लर्को की
भर्ती को अवैध ठहराकर नई नियुक्ति करने का आदेश जारी किया था।
हाई कोर्ट के
जस्टिस मसीह ने इस भर्ती प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाते हुए स्पष्ट तौर
पर कहा था कि भर्ती के नाम पर केवल लीपापोती ही की गई ताकि एडहॉक पर पहले
से ही कार्य कर रहे क्लर्को को एडजस्ट किया जा सके। खंडपीठ ने देवेंद्र
श्योकंद की याचिका स्वीकार करते हुए भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से करने के
निर्देश दिए थे। यह प्रक्रिया दो माह में पूरी करने को कहा गया था। इस
मामले में याचिकाकर्ता ने विधानसभा के स्पीकर पर अपने विधानसभा क्षेत्र के
लोगों को नौकरी देने का भी आरोप लगाया था।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता का वह तर्क सही दिख रहा है कि
89 दिनों की एडहॉक अवधि के आधार पर भर्ती किए गए क्लर्को को नियमित भर्ती
देने के लिए शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया आंखों में धूल झोंकने के समान है।
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