पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंगलवार को
एक साथ सैकड़ों याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश में
वर्तमान में 8763 जेबीटी टीचरों की भर्ती में बीएड पास उम्मीदवार भाग नहीं
ले सकते। हाई कोर्ट के इस आदेश से हजारों बीएडधारक जिसने जेबीटी टीचर की
पात्रता परीक्षा पास की हुई है के अरमानों पर पानी फिर गया है।
इससे पहले हाई कोर्ट ने पिछले महीने इन टीचर को प्रोविजिनल तौर पर इस भर्ती
प्रकिया में भाग लेने की अनुमति दी थी। मंगलवार को जेबीटी टीचरों की तरफ
से अर्जी दायर कर बीएड टीचरों की इस मांग का विरोध किया कि उनको जेबीटी
भर्ती में भाग लेने दिया जाए। जेबीटी टीचर की तरफ से अनुराग गोयल व जगबीर
मलिक ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि
जेबीटी भर्ती में बीएडधारक भाग नहीं ले सकते तो अब इनका यह दावा उचित नहीं
है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस मामले में बीएडधारक सरकार की जिस
अधिसूचना का हवाला दे रहे हैं उसकी अंतिम तिथि इस साल जनवरी तक थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि जेबीटी पोस्ट पर बीएडधारक को तभी
मौका दिया जा सकता है जब जेबीटी उम्मीदवार न मिल रहे हों और राज्य सरकार
एनसीटीई से आग्रह करे। हाई कोर्ट में लगभग चार घंटे से ज्यादा सुनवाई हुई व
बीएड टीचर की तरफ से कई वकीलों ने पैरवी की।
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एके सिकरी की खंडपीठ ने याचिका को खारिज करने का
फैसला सुनाया। इस फैसले से जेबीटी भर्ती में देरी के बादल छंट गए। पीजीटी
में कट ऑफ मार्क्स व अध्यापक पात्रता में छूट पर फैसला बृहस्पतिवार को हाई
कोर्ट के चीफ जस्टिस चार साल अनुभव वाले टीचरों को अध्यापक पात्रता
परीक्षा में छूट देने के हरियाणा सरकार के फैसले व अध्यापक भर्ती बोर्ड
द्वारा पीजीटी टीचर भर्ती में कट ऑफ मार्क्स के खिलाफ याचिका पर
बृहस्पतिवार को सुनवाई करेंगे।
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