दिल्ली
विश्वविद्यालय में सत्र 2013-14 से लागू हो रहे चार वर्षीय ग्रेजुएशन
प्रोग्राम के तहत बीए, बीकॉम व बीएससी का भेद भी खत्म होने जा रहा है।
जानकार हैरानी तो होगी लेकिन अब डिग्री के नाम पर होने वाले अंतर को खत्म
कर विश्वविद्यालय में एक ही डिग्री छात्रों को बांटी जाएगी और इसे
‘बैकलॉरेट’ के नाम से जाना जाएगा।
विवि में चार वर्षीय ग्रेजुएशन प्रोग्राम के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने
के लिए गठित टास्क फोर्स की ओर से ही बैकलॉरेट का नाम सामने रखा गया है।
इस बाबत् एक प्रस्ताव भी टास्क फोर्स की हाल ही में हुई बैठक में आया था,
जिसे मंजूरी दे दी गई है। हालांकि इसे औपचारिक मंजूरी के लिए अभी डीयू की
एकेडमिक व एग्जीक्यूटिव काउंसिल से मंजूरी मिलना बाकी है।
क्या है ‘बैकलॉरेट’ और कैसी होगी डिग्री
बैकलॉरेट एक फ्रेंच शब्द है, जिसका अर्थ होता है बैचलर।
विश्वविद्यालय चार साल के डिग्री कोर्स को लेकर इसका नाम भी बदल रहा है।
इसके लिए डीयू की अंडरग्रेजुएट डिग्री को नया नाम देना प्रस्ताव भी टास्क
फोर्स के समक्ष लाया जा चुका है।
प्रस्ताव के तहत दो साल की डिग्री एसोसिएट बैकलॉरेट कहलाएगी। जबकि चार
साल की डिग्री बैकलॉरेट विद ऑनर्स कहलाएगी। दरअसल तीसरे साल के बाद चौथा
साल बीएड का होगा। बीएड तीसरे साल के बाद चौथे साल का एकीकृत हिस्सा होगा।
विद्यार्थी दूसरे साल, तीसरे साल में कोर्स छोड़कर डिग्री ले सकते हैं।
दूसरे साल एसोसिएट बैकलॉरेट व तीसरे साल में बैकलॉरेट की डिग्री मिलेगी।
पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए भी विशेष प्रावधान
चार वर्षीय ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम के तहत पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के
इच्छुक छात्रों के लिए भी दो अलग-अलग विकल्प है। पहले विकल्प के तहत छात्र
तीसरे साल के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम में दाखिला ले सकता है। जबकि
दूसरे विकल्प में वह चार साल का कोर्स पूरा कर पोस्ट ग्रेजुएशन कर पाएगा,
ऐसा करने पर वह महज एक साल में ही पोस्ट ग्रेजुएशन कर सकेगा।
No comments:
Post a Comment